पुष्प

 फूल सदा मुस्काते हैं , मुस्कुराना ही सिखाते हैं 

मुरझाने के बाद फिर से खिल जाते हैं 

जब तक वे डाल पर लगे रहते हैं 

प्यारे परिवार की सही परिभाषा 

फूलों से सजी बगिया बताती है।

अनेक रंग के फूलों से सजा बाग 

घर जैसा ही होता है जहां 

अनेंक रंग से रंगे व्यक्तित्व को ,

मां पिता  अपने प्रेम और संस्कारों से

संवारते सींचते बगिया परिवार की ।

कुछ फूल खिलकर बाग का मान बढ़ाते हैं

सब उसको ही निहारते हैं बार बार 

और  लगातार  .......

बगिया में लगा गुलाब सबको भाता है 

कितने कांटों के बीच रहकर,

 अपनी सुंदरता को वो बचाता है 

और लोग उसे तोड़ लेते हैं,।

इस पर भी वो इतराता है ,अपनी खुशबू पर

गेंदे के मध्य हार में उसे पिरोया जाता है

और सूखे हार से निकाल कर भी उसे सहेजते है लोग प्रेम वश प्रसाद मान पुस्तकों में सजाते हैं

एक गुलाब सौंदर्य तो होता बाग का पर

परिवार नहीं।.......

अनेंक भावों से सजा परिवार कई रंगों से सजा बाग

सादगी और संजीदगी दोनों को बढ़ाता है।

 इस बगिया की हकदार नहीं

 मैं कोई माली नहीं ,

धन्यवाद प्रभु का और प्रिय बहन का, कि 

दर्शन मिल जाते हैं इतनी दूर बैठे

तकनीकी दुनिया के कारण ।

🌹🌹🌹🌹💐❤️

@सुधा त्रिपाठी शुक्ला ✍️

स्वरचित मौलिक

मुंबई महाराष्ट्र

२४/२/२०२१

Comments

  1. बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ

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